कैराना की सियासत के वारिस
कैराना की राजनिती पर लम्बे समय से दो नेताओं का क़ब्ज़ा रहा जिनमें स्वर्गीय साँसद हुकुम सिँह और मरहुम चौधरी मुनव्वर हसन दोनों ही गुर्जर समाज के बड़े नेता रहे एक हिन्दु गुर्जरो का नेता तो दुसरा मुस्लिम गुर्जरो का नेता जहाँ हुकुम सिंह सात बार विधायक एवम् एक बार साँसद बने
कैबिनेट मँत्री रहे भाजपा विधायक दल के नेता रहे
वही मुनव्वर हसन ने बहुत कम समय मे वो मुक़ाम हासिल किया जो हर नेता की चाहत होती है बहुत कम समय के कार्यकाल मे मुनव्वर हसन दो बार विधायक उत्तर प्रदेश विधानसभा ,एक बार विधायक विधानपरिषद, दो बार लोकसभा साँसद ,एक बार राज्यसभा साँसद बनकर सबसे कम उम्र मे देश के चारों सदनों मे पहुँच कर गिनिज बुक मे अपना नाम दर्ज कराया मुनव्वर पश्चिम उत्तर प्रदेश के बड़े नेता थे सपा मे जो उन्होंने चाहा वो हुआ !
अब दोनों के सियासी वारिस की बात करे तो मुनव्वर हसन की पत्नी तब्बसुम हसन कैराना से साँसद बनी उन्होंने हुकुम सिंह को हराया था मुनव्वर का बेटा नाहिद हुकुम सिंह से लोकसभा चुनाव हार गया था उसके बाद कैराना विधानसभा सीट ख़ाली हुई तो नाहिद ने हुकुम सिंह के भतीजे अनिल चौहान को हरा क विधायक बने 2017 के चुनाव मे हुकुम सिंह की बेटी म्रगाँका सिंह को हराकर नाहिद दुसरी बार विधायक बना ॥
मुनव्वर की विरासत पर उनकी पत्नी और बेटे ने क़ब्ज़ा कर लिया है ।
अब हुकुम सिंह की राजनीतिक विरासत पर उनकी बेटी मर्गाका सिंह और भतीजे अनिल चौहान मे विरासत हासिल करने की होड़ है विरासत जनता किसको सौंपती है यह तो वक़्त ही बताएगा वही गुर्जर राजनिती पर शामली के क़द्दावर नेता एम एल सी विरेन्द्र सिंह की भी निगाह है
आने वाले चुनाव मे भी मुनव्वर हसन की पत्नी पुर्व साँसद तब्बसुम हसन और हुकुम सिंह की बेटी म्रगाँका के बीच ही चुनाव होगा वही से हुकुम सिंह का वारिस तय होगा।
कैबिनेट मँत्री रहे भाजपा विधायक दल के नेता रहे
वही मुनव्वर हसन ने बहुत कम समय मे वो मुक़ाम हासिल किया जो हर नेता की चाहत होती है बहुत कम समय के कार्यकाल मे मुनव्वर हसन दो बार विधायक उत्तर प्रदेश विधानसभा ,एक बार विधायक विधानपरिषद, दो बार लोकसभा साँसद ,एक बार राज्यसभा साँसद बनकर सबसे कम उम्र मे देश के चारों सदनों मे पहुँच कर गिनिज बुक मे अपना नाम दर्ज कराया मुनव्वर पश्चिम उत्तर प्रदेश के बड़े नेता थे सपा मे जो उन्होंने चाहा वो हुआ !
अब दोनों के सियासी वारिस की बात करे तो मुनव्वर हसन की पत्नी तब्बसुम हसन कैराना से साँसद बनी उन्होंने हुकुम सिंह को हराया था मुनव्वर का बेटा नाहिद हुकुम सिंह से लोकसभा चुनाव हार गया था उसके बाद कैराना विधानसभा सीट ख़ाली हुई तो नाहिद ने हुकुम सिंह के भतीजे अनिल चौहान को हरा क विधायक बने 2017 के चुनाव मे हुकुम सिंह की बेटी म्रगाँका सिंह को हराकर नाहिद दुसरी बार विधायक बना ॥
मुनव्वर की विरासत पर उनकी पत्नी और बेटे ने क़ब्ज़ा कर लिया है ।
अब हुकुम सिंह की राजनीतिक विरासत पर उनकी बेटी मर्गाका सिंह और भतीजे अनिल चौहान मे विरासत हासिल करने की होड़ है विरासत जनता किसको सौंपती है यह तो वक़्त ही बताएगा वही गुर्जर राजनिती पर शामली के क़द्दावर नेता एम एल सी विरेन्द्र सिंह की भी निगाह है
आने वाले चुनाव मे भी मुनव्वर हसन की पत्नी पुर्व साँसद तब्बसुम हसन और हुकुम सिंह की बेटी म्रगाँका के बीच ही चुनाव होगा वही से हुकुम सिंह का वारिस तय होगा।
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